
जिम्मेदारों की लापरवाही से फखरपुर कस्बे में बढ़ रही परेशानियां: इंटरलॉकिंग के स्थान पर कब्जा
फखरपुर (बहराइच) – कस्बे में जिम्मेदारों की लापरवाही और उदासीनता के चलते सड़क की इंटरलॉकिंग का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। जहां एक ओर इंटरलॉकिंग के निर्माण की आवश्यकता थी, वहीं वहां पर कब्जेदारों ने अस्थायी दुकानें बना ली हैं। इससे न केवल सड़क की स्थिति खस्ता हो गई है, बल्कि जाम की समस्या भी बढ़ गई है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई है जब जिम्मेदारों ने सड़क के किनारे इंटरलॉकिंग के लिए छोड़े गए स्थान पर कब्जा होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके परिणामस्वरूप, कस्बे के नागरिकों और राहगीरों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कस्बे के लोग, जिनमें आदिल, रमजान, बृजेश शुक्ला, और दिनेश जैसे व्यापारी और नागरिक शामिल हैं, उन्होंने इस समस्या को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका कहना है कि यह मार्ग पहले काफी चौड़ा था, लेकिन अब इसे संकरा कर दिया गया है। ठेकेदार ने सड़क की चौड़ाई कम कर दी, जिससे गुजरने में भारी समस्या हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीणों के लिए यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जैतापुर, वजीरगंज और अन्य गांवों के लोग भी इस मार्ग से गुजरते हैं। संकरी सड़क पर दो चार पहिया वाहन एक साथ गुजरने से जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है, और अब दुकानें लगने के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।
तीन साल पहले व्यापारियों और नागरिकों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया था और कई शिकायती पत्र दिए थे। फिर सरकार ने सड़क के सुधार के लिए 45.38 लाख रुपये की लागत से 500 मीटर सड़क की इंटरलॉकिंग का कार्य शुरू किया था। हालांकि, तीन साल बीत जाने के बाद भी इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा नहीं हुआ है। इसके बजाय, ठेकेदार ने सड़क के दोनों साइड की जमीन को खोदकर उसे संकरा कर दिया और अब सड़क के किनारे दुकानें लगने के कारण जाम की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। यह स्थिति सीधे तौर पर नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है और इस पर तत्काल कार्यवाही की आवश्यकता है।
फखरपुर के खंड विकास अधिकारी अजय प्रताप सिंह ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे की जानकारी नहीं है, लेकिन वह इसे संबंधित ग्राम पंचायत से सत्यापित कराएंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस मामले में जल्दी कार्रवाई की जाएगी और दोनों साइडों की पटरी पर इंटरलॉकिंग का निर्माण कराया जाएगा। हालांकि, यह जवाब नागरिकों को संतुष्ट नहीं करता क्योंकि यह समस्या वर्षों से बनी हुई है, और बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस प्रकार की लापरवाही से नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है, और उन्हें यह सवाल उठाने का अधिकार है कि जब सार्वजनिक कार्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, तो क्या ये कार्य पूरी तरह से जिम्मेदारी से नहीं किए जाते?
इस मामले में सबसे बड़ी चिंता यह है कि सड़क के किनारे से कब्जा हटाने के बजाय जिम्मेदारों ने इसे नजरअंदाज किया है। इन अस्थायी दुकानों की वजह से न केवल यातायात की समस्या उत्पन्न हो रही है, बल्कि सड़क की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। इसके साथ ही जाम की समस्या से निजात पाने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि जिम्मेदारों ने समय रहते इस मामले पर ध्यान दिया होता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। अब सवाल यह है कि क्या फखरपुर कस्बे के नागरिकों को बिना किसी परेशानी के एक सामान्य सड़क का अधिकार मिलेगा या इस लापरवाही के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी? जनरथ एक्सप्रेस
