बहराइच के शिवपुर ब्लॉक में प्रतिबंधित पेड़ों की अवैध कटाई का सिलसिला जारी
पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में बाधक बन रही अवैध पेड़ कटाई
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के शिवपुर ब्लॉक के कई ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिबंधित पेड़ों की अवैध कटाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। जबकि केंद्र और राज्य सरकारें पर्यावरण संरक्षण के लिए अनेक योजनाएं चला रही हैं, लेकिन कुछ लोग केवल चंद पैसों के मुनाफे के लिए हरे-भरे पेड़ों को कटवा रहे हैं। सरकार की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और वन विभाग के निर्देशों के बावजूद, अवैध रूप से पेड़ों की कटाई जारी है, जिससे पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। खासकर आम, शीशम और अन्य कीमती पेड़ों को गैरकानूनी तरीके से काटा जा रहा है, जिनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने स्पष्ट दिशानिर्देश दिए हुए हैं। इस अवैध कार्य में वन विभाग की निष्क्रियता से यह सवाल उठता है कि क्या इस काम में विभाग की मिलीभगत है।
वन विभाग की निष्क्रियता और अवैध कटाई का सिलसिला
शिवपुर ब्लॉक के गांवों में वन विभाग के अधिकारी स्थिति को नजरअंदाज कर रहे हैं, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों को इस गतिविधि की पूरी जानकारी है। रिसिया ब्लॉक के लौकी ग्राम पंचायत में आम के प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई इसका एक ताजा उदाहरण है, जहां पर स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। वन विभाग ने कुछ कार्यवाही की है, लेकिन इसके बावजूद अवैध कटाई का काम थमा नहीं है। लोगों का मानना है कि वन विभाग के अधिकारी इस गतिविधि में शामिल हैं और उन्होंने कई जगहों पर आंख मूंद कर परमिट से अधिक पेड़ों की कटाई की अनुमति दी है। वन विभाग की इस अनदेखी का खामियाजा पूरे पर्यावरण को भुगतना पड़ रहा है और इलाके के प्राकृतिक सौंदर्य पर भी असर पड़ रहा है।
पर्यावरण संरक्षण में बाधक है अवैध कटाई
बहराइच के इन इलाकों में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है। पेड़ों की कटाई के कारण इस क्षेत्र में बंजर भूमि बढ़ रही है और जैव विविधता पर भी संकट मंडरा रहा है। हरे-भरे पेड़ न केवल वायुमंडल में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं, बल्कि वे अनेक वन्य जीवों का आश्रय स्थल भी होते हैं। इसके अलावा, पेड़ों की जड़ों के कारण भूमि का कटाव रुकता है और भूजल का स्तर भी संतुलित रहता है। लेकिन, कुछ लोग इस बात की अनदेखी कर रहे हैं और पेड़ों को नुकसान पहुंचाकर पर्यावरण को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं। ऐसी स्थिति में सरकार और प्रशासन को इस दिशा में कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों की शिकायतें और उनकी अनदेखी
शिवपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायतों में स्थानीय निवासियों ने कई बार इस अवैध कटाई के खिलाफ आवाज उठाई है, लेकिन उनकी शिकायतों पर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार सूचित किया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का मानना है कि वन विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और केवल कागजी कार्रवाई करके इस मामले को नजरअंदाज कर देते हैं। इस वजह से पेड़ों की कटाई का कार्य दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है और पर्यावरणीय संकट भी बढ़ रहा है।
वन विभाग और सरकार के लिए उठ खड़ा होना जरूरी
अब समय आ गया है कि वन विभाग इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाए और इस अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए। इसके अलावा, सरकार को भी इस दिशा में सख्ती बरतनी चाहिए और उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अवैध पेड़ कटाई से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है, लेकिन अब भी सख्त कदम उठाए जाएं तो इस स्थिति में सुधार लाया जा सकता है
जनरथ एक्सप्रेस

