
जनरथ एक्सप्रेस | इम्तियाज़ अहमद
फखरपुर (बहराइच)
ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली आयतुल्लाह खामनेई की शहादत की खबर पर क्षेत्र के शिया समुदाय में गहरा गम और आक्रोश देखा गया। फखरपुर के सादुल्लापुर स्थित कर्बला में आयोजित एक विशेष मजलिस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उलेमा और स्थानीय लोगों ने शिरकत की और शहीद रहबर को नम आंखों से खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने अपने संबोधन में अमेरिका और इजरायल पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर की शहादत एक सच्चे मुजाहिद की शहादत है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे बुजदिलों की तरह बंकरों में छिपने वाले नेता नहीं थे, बल्कि अपनी जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जुल्म के खिलाफ डटे रहे।
मौलाना ने भावुक होकर कहा कि हम कर्बला के मानने वाले हैं और शहादत से नहीं डरते। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक सुप्रीम लीडर की शहादत से हमारा हौसला कम नहीं होगा। हम हजारों कुर्बानियां देने को तैयार हैं, लेकिन जालिम के आगे घुटने टेकना हमारे ईमान के खिलाफ है।
उन्होंने उन माताओं का भी जिक्र किया जो अपने शहीद बेटों पर फख्र करती हैं, क्योंकि इस्लाम में शहादत का मुकाम बहुत ऊंचा है।
दुनिया के मौजूदा हालातों पर टिप्पणी करते हुए मौलाना सैय्यद अनीस ने कहा कि आज ज्यादातर मुस्लिम देश अमेरिका और इजरायल के दबाव में हैं, लेकिन केवल ईरान ही ऐसा देश है जिसने अकेले दम पर जुल्म के खिलाफ मोर्चा संभाला और शहादत को गले लगाना बेहतर समझा।
मौलाना सैय्यद बाकिर सुजाद ने कहा कि ईरान कभी जालिम ताकतों के साथ नहीं खड़ा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि फिलिस्तीन में मासूम बच्चों पर जुल्म किया गया और ईरान के एक स्कूल पर हमले में 170 से अधिक बच्चों की जान गई। ऐसे जुल्म के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
मौलाना नूर-ए-आइन मिस्बाही ने शिया-सुन्नी एकता पर जोर देते हुए कहा कि हम सब एक खुदा को मानने वाले हैं। इस दौरान “लब्बैक या हुसैन” के नारों से माहौल गमगीन होने के साथ-साथ जोश से भी भर गया।
शिया आलिमों ने आयतुल्लाह खामनेई के जीवन और उनकी सेवाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्हें आधुनिक युग का महान क्रांतिकारी नेता बताया।
इस मौके पर मौलाना सैय्यद शामसी (बहराइच), मौलाना सैय्यद अजीम (बहराइच), फौज बहराइची सहित सादुल्लापुर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।